छत्तीसगढ़

सड़क पर जन्मदिन मनाने की घटनाओं पर हाईकोर्ट सख्त

Shantanu Roy
30 May 2026 11:05 PM IST
सड़क पर जन्मदिन मनाने की घटनाओं पर हाईकोर्ट सख्त
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छग
Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक सड़कों पर वाहनों की कतार लगाकर और सड़क को अवरुद्ध कर जन्मदिन मनाने की बढ़ती घटनाओं पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा है कि बार-बार निर्देशों के बावजूद ऐसी घटनाएं नहीं रुक रही हैं, जो सीधे तौर पर अदालत के आदेशों का उल्लंघन है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और पुलिस की ओर से प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण अब ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ अदालत के आदेशों के उल्लंघन का मुकदमा चलाने पर विचार करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति कानून व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाती है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां लोग सड़क पर कारें खड़ी कर, लग्जरी वाहनों का काफिला निकालकर या सार्वजनिक स्थानों पर केक काटकर जन्मदिन मनाते हैं। इससे न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोर्ट ने इस मामले पर पहली बार फरवरी 2025 में रायपुर में एक मॉल संचालक के बेटे द्वारा सड़क जाम कर जन्मदिन मनाने के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था। उस समय अदालत ने राज्य सरकार को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद ऐसे मामलों में कमी नहीं आई और लगातार नई घटनाएं सामने आती रहीं।
इसके बाद भी हाईकोर्ट ने कई बार राज्य शासन को निर्देश दिए कि सार्वजनिक सड़कों पर इस तरह के आयोजनों पर रोक लगाई जाए, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। हाल ही में कुछ और मामलों में भी सड़क पर जन्मदिन मनाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिससे अदालत की चिंता और बढ़ गई। एक अन्य मामले में कुछ माह पूर्व स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के पीए की पत्नी का सड़क पर जन्मदिन मनाए जाने पर भी कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी। उस दौरान अदालत ने कहा था कि जब किसी मंत्री के कार्यालय से जुड़े व्यक्ति का नाम सामने आता है, तो संबंधित विभाग को स्वयं कार्रवाई करनी चाहिए।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के अधिवक्ता से स्पष्ट रूप से कहा कि अब प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में विफल दिखाई दे रहा है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो अदालत को स्वयं संबंधित व्यक्तियों को पक्षकार बनाकर उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई करनी पड़ सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाएं केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि यह कानून व्यवस्था को खुली चुनौती भी हैं। कुछ लोगों द्वारा सार्वजनिक स्थानों का उपयोग निजी उत्सवों के लिए किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा हो रही है।
अदालत ने यह भी चिंता जताई कि ऐसे मामलों में मामूली जुर्माना लगाकर आरोपियों को छोड़ दिया जाता है, जिससे न तो रोकथाम हो पा रही है और न ही कोई सख्त संदेश जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अब यह रवैया स्वीकार्य नहीं होगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक बार फिर सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह के आयोजनों को रोकने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, अन्यथा अदालत को कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
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